Testimonials

 

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On 22nd feb2010 I got an opportunity to be a part of Charkha but at that time I did not know Charkha or its objectives. I took a part in workshop just like that. Charkha’s training was for five days. On the fourth day we were taken to Chhaprarghat Math for field visit. On reaching the village we actually realized that how difficult is the life of the villagers. We got an opportunity to see the merciful situation they are living in these villages. We wrote articles on their conditions and livelihood. We continued writing articles after the completion of training. Our way of looking at life completely Changed after Charkha’s training. For the first time we felt confident within. Earlier I used to get scared of going anywhere alone. I could not talk to anyone with confidence. I was just busy with my work. I was not open to conversations.  But after attending Charkha’s training I could overcome these inhibitions. Now I find myself quite occupied. I always had a desire to work for people which I now see myself fulfilling. Charkha gave us the tool we always needed but never realised.  We got the art of giving words to our feelings from the training by Charkha. Charkha has given us a new direction, with which we can understand our duties and be good citizens. We cannot make someone’s life heaven but we can at least show the path. Kavita Kumari

चरखा में जुड़नें से एक नयी पहचान मिली: कविता कुमारी झा
22 फरवरी 2010 को मुझे चरखा में भाग लेने का अवसर मिला परन्तु उस वक्त मैं न तो चरखा को जानती थी और न ही उसके उददेश्‍यों को । हंसी मजाक में मैंने चरखा में हिस्सा लिया । चरखा की ये ट्रेनिंग 5 दिनों की थी। चौथे दिन हमें प्रैक्टिकल के लिए छपरारघाट मंठ ले जाया गया । वहां जाकर हमने महसूस किया कि वाकई उन लोगों की जिन्दगी कितनी मुश्किलों भरी हैं। दयनीय स्थिति से जूझ रहें इन लोगों से रु ब रु होने का मौका मिला । हमने उन लोगों की  दयनीय स्थिति पर आर्टिकल्स भी लिखा । हमारी ट्रेनिंग समाप्त होने के बाद भी हम आर्टिकल्स लिखते रहें। चरखा के ट्रेनिंग के बाद हमारी दुनिया को देखने का तरिका बदल गया। हमारे अंदर अजीब सा कॉन्फिडेंस आने लगा। पहले मुझे अकेले कहीं भी जाने से डर लगता था। मैं पहले किसी से भी कॉन्फिडेंस के साथ बात नहीं कर पाती थी । बस अपने काम से काम रहता था। मैं किसी से खुलकर बात नहीं कर पाती थी । लेकिन चरखा के आने के बाद मुझे इन सारी खामियों से काफी हद तक छुटकारा मिला। अब मैं अपने आप को काफी व्यस्त महसुस करती हूं। मुझे लोगों के लिए कुछ करने की बहूत इच्छा थी जो अब पुरी होते हुए दिख रही हैं। चरखा ने हमें वो दिया जिसकी हमें जरुरत होते हूए भी उसका एहसास नहीं था। हमें अपने किसी भी तरह के शवों को अपने शब्दों में बॉय करने की कला हमें चरखा से ही मिली हैं। चरखा ने हमें एक नई दिशा दी हैं। जिससे हम अपने कर्तव्यों को समझकर नागरिक होने का फर्ज अदा कर सकते हैं। किसी के जीवन को पूरी तरह स्वर्ग नहीं बना सकते परंतु रास्ता तो दिखा सकते है ना। कविता कुमारी

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Since Childhood I was bent towards village issues. Lack of order/system in villages used to shock me. I wanted to do something to improve the system and their life would be happier but no one could show me the way to do it. When I told my family about my desire to work for the villagers, they told me that girls are not supposed to do such work, just pay attention on your family and do not think about these illogical things. But since I had thought of it I had move in this direction. I was waiting to turn eighteen because everyone said after this age everyone can take their own independent decisions. And when I actually turned eighteen I got an opportunity which I grabbed with both hands without wasting anytime. We gained a lot of knowledge from the workshop organized by Mithila Gram Vikas Parishad. Also it answered all my questions and increased my understanding of issues. I guess this made one of my dreams come true, which was to go to villages and understand the issues of the poor villagers. Seeing all this I got a feeling may be I too can help them a little by writing about them and become a true and honest citizen of the country. For all this, I thank, Mithila Gram Vikas Parishad, media workshop, Narayan Sir, Anis Sir, and Laxmi, that they helped me in showing the way. And I know that this organization will help and show way to more women like me. Many Many thanks to Charkha too. Priyanka Kumari

मिथिला ग्राम विकास परिषद
बचपन से ही मेरा रुझान गांव के प्रति था। मुझे गांव की अव्यवस्था से हमेशा आघात पहूंचता था। मैं चाहती थी कि कुछ ऐसा करुं जिससे इनकी व्यवस्था सुढ्रढ़ हो सके तथा इनका जीवन खुशहाल हो पर कभी किसी ने रास्ता नहीं बताया । अपने परिवार को अपनी इच्छा मैंने जब बतायी तो उन्होंने कहा ये सब लड़कियों का काम नहीं हैं । बस अपने परिवार पर घ्यान दो ज्यादा फालतू की बातें मत सोचों। पर मैंने जो सोच लिया था तब मुझे इस रास्ते में आगे बढ़ना ही था चाहें जो हो । बस मुझे इंतजार था मेरी उम्र अठारह साल होने का। क्योंकि सब कहते हैं। इस उम्र के बाद ही लोग खुद फैसला लेते हैं सही मायनों में जब मैं अठारह की हुई तभी मेरे सामने एक मौका आया । मैंने बिना समय गंवाये इस मौके का लाभ उठाया । मिथिला ग्राम विकास परिषद के द्वारा हमें मीडिया वर्कशॉप से बहुत सारी शिक्षाये प्राप्त हुई हैं। तथा इसमें हर वो बात बतायी गयी जिसे मैं जानना और समझना चाहती थी। इस दौरान शायद मेरा एक सपना पूरा हुआ। वो या गांव जाकर ग्राम विकास को देखना तथा वहां की समस्याओं से परिचित होना। इन सबसे मेरे अंदर ये भावना जगी की शायद मैं भी गरीब लोगों की तकलीफ कम करने में थोड़ी सहायता कर सकती हूं। और इस देश की सच्ची तथा ईमानदार पत्रकार बन सकती हूं। इन सब बातों के लिए मैं मिथिला ग्राम विकास परिषद का मीडिया वर्कशॉप का नारायण सर का अनिश सर का तथा लक्ष्मी दीदी को घन्यवाद करती हूं। कि इन्होंने मुझे रास्ता दिखाने में अपनी ओर से पुरी सहायता प्रदान की । तथा मैं जानती हूं ये संस्था मेरी तरह सोच रखने वाली और भी बहुत सारी लड़कियों को रास्ता दिखाएगा । चरखा को भी मेरी ओर से बहुत बहुत घन्यवाद । प्रियंका कुमारी

 

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I, Qmre Alam Shaz, am a journalist working for Hindi and Urdu newspapers, resident of block Pupri Distt Sitamarhi Bihar. I always had keen interest in writing, but could not express myself well in words. Incidentally Charkha Development Communication Network organized a 5 day Writing workshop in Darbhanga Distt. I enrolled in that workshop and gathered information on journalism, which helped me a lot in writing features. Recently I wrote a feature on Urdu Language and sent it to Charkha. At Charkha my article was polished/ edited beautifully. Two newspapers from Bihar Quami Tanzeem and Siyasi Tanzeem published my article. As a result I received a number of calls from Bihar and Jharkhand appreciating my article and said it is a very important issue that you have raised. This news spread like fire and I received calls from the editorial office of the newspapers. The credit for this huge appreciation goes to Charkha. I would like to especially thank the Charkha Family; it is because of them that our issues are spread all over. I would like to particularly thank Urdu Editor “Md Anis Ur Rahman Khan”, as he helped me gain tremendous respect through my articles published in various Newspapers. Qamre Alam Shaz

मैं मो0 कमरे आलम शाज ग्राम पोस्ट आवापुर दक्षिण जिला सीतामढ़ी बिहार के एक अनुमंडल पुपरी में उर्दू एवं हिन्दी पेपर के लिए पत्रकारिता करता हूं मुझे लिखने का बहुत शौक था। पर पूर्णतः सजाकर नहीं लिख पाता था। संयोग वस चरखा डेवलपमेंट की ओर से पांच दिवसीय प्रशिक्षण दरभंगा जिला में हो रहा था मैं उसी में सम्मित हुआ तो मुझे पत्रकारिता की कुछ जानकारियां मिली जिससे मुझे लिखने में काफी सहयोग मिला । अब मैं छोटा छोटा फीचर भी लिख लेता हूं। अभी हाल में उर्दू भाषी एवं उर्दू भाषा से रिलेटेड एक छोटा सा फीचर लिखा था और चरखा को भेज दिया था। चरखा ने उसे सजाकर सवाड़कर इतना अच्छा किया जिसकी कोई मिशाल नहीं वह बिहार के दो अखबार एक कौमी तंजीम दूसरा सियासी तंजीम में लगी थी जिस पर बिहार  झारखंड समेत जिला से भी काफी फोन आया और उन्होनें कहां की बहुत अच्छी खबर हैं। जिसको आप लोगों के जरिये उठाया जा रहा है। और बिजली की तरह यह बाते फैल गई यहां तक के सम्पादकीय कार्यालय से भी फोन आया था। इन सब फोन का रहस्य चरखा को जाता है। खासकर मैं चरखा के मैं पुरे परिवार का शुक्रियादा करना चाहता हूं कि आप लोगों के जरिये कोने कोने तक फैल रही है। खासतौर पर उर्दू फिचर को अच्छे  घंग से सवारने के लिए मैं श्री अनिसुररहमान खान का शुक्रियादा करता हूं कि आप लोगों ने अखबारों के जरिए काफी सम्मान दिया है। मो0 कमरे आलम शाज

 


 
 
 

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