कार्य को शब्‍दों में ढालते हुए
 



चरखा मुख्याधारा की मीडिया

जब मुख्‍यधारा की पत्रकारिता में राजनीतिक समाचारों की भरमार हो, शहरों पर ध्‍यान केन्द्रित हो, हत्‍या-लूटपाट की सनसनी हो, पेड न्‍यूज से अखबार भरे पड़े हो, ऐसे में विकल्‍प क्‍या बचता है – या तो मीडिया को जी भर के कोसिए या फिर वैकल्पिक मीडिया के मार्ग को प्रशस्‍त कीजिए। 'चरखा' ने अंधकार को कोसते रहने के बजाय दीया जलाना बेहतर समझा। चरखा की बहुविध गतिविधियों को देखने के बाद किसी के लिए भी इस पर गर्व करना सहज है।  

एक पत्रकार के नाते मुझे महसूस हुआ कि मीडिया हकीकत से कोसो दूर है। वह लोगों को न समुचित सूचना मुहैया करा रहा है और न ही शिक्षित कर रहा है, हां, व्‍यापक पैमाने पर वह मनोरंजन जरूर कर रहा है। मैं ब्‍लॉग के माध्‍यम से 2006 में इंटरनेट पर सक्रिय हुआ। सन् 2008 में हमने इसे विस्‍तार देते हुए प्रवक्‍ता डॉट कॉम का रूप दिया। लेखकों से निवेदन किया कि अपनी रचनाएं हमें भेजें। बड़ी संख्‍या में लेख भी आने लगे। लेकिन गुणवत्ता की दृष्टि से अधिकांश लेख कमजोर होते थे। तब हमने विकासात्‍मक पत्रकारिता पर जोर देना शुरू किया। लेकिन अधिकांश लेखों में वैचारिकता कम और अतिराष्‍ट्रवाद का पुट अधिक होता था। इसी क्रम में हमने इंटरनेट पर चरखा द्वारा जारी एक लेख पढ़ा। अच्‍छा लगा। हमने इसे 'प्रवक्‍ता' पर प्रकाशित कर दिया। लेकिन ध्‍यान रखा कि इसे 'चरखा से साभार' के रूप में प्रकाशित किया जाए। बाद में एक दिन चरखा के  हिंदी संपादक शम्‍स जी का फोन आया कि आपने यह कहां से लिया है? तो हमने उन्‍हें सब बताया। उन्‍होंने प्रेमपूर्वक कहा, 'हमें अच्‍छा लगा कि आपने यह लेख प्रकाशित किया और चरखा का जिक्र होने से हमें और भी अच्‍छा लगा।' फिर तो एक सिलसिला चल पड़ा। हर पखवाड़े उनका मेल आ जाता और हम उसे उत्‍साहपूर्वक प्रवक्‍ता पर अपलोड  कर देते हैं।

'प्रवक्‍ता' के संपादक के नाते यह कहने में मुझे कोई हिचक नहीं है कि चरखा द्वारा जारी लेख गागर में सागर की तरह होते हैं। इसे बड़े चाव के साथ पढ़ा जाता है। अच्‍छी हिट्स मिलती हैं और गंभीर टिप्‍पणियां आती हैं। विषयवस्‍तु की विविधता व्‍यापक होती है। गुणवत्ता की दृष्टि से भी उल्‍लेखनीय। यथार्थपरक और वैज्ञानिक दृष्टि से युक्‍त। ऐसा होना सहज है क्‍योंकि जिस महापुरूष के कर्तृत्‍व से चरखा पुष्पित और पल्‍लवित हुआ है उनके विचार भी ऐसे ही उदात्त थे। श्री संजय घोष की पुण्‍य-स्‍मृति को प्रणाम।

संजीव कुमार सिन्‍हा
संपादक
www.pravakta.com

चरखा डी-1947, पालम विहार, गुडगांव-122017, हरियाणा
 ईमेल - charkha@bol.net.in फोन - +91-124-4079082
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